क्या रीलबाज़ी कांग्रेसियों पर हावी ? कांग्रेस के आंदोलन में उड़े 8 ड्रोन, क्या भिलाई विधायक ने सभी को रीलबाज़ बना दिया है ?

बिलासपुर। NEET पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस ने बिलासपुर में सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव किया। प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार और भाजपा को इस मुद्दे पर घेरना था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन से ज्यादा चर्चा नेताओं और कार्यकर्ताओं की फोटोबाज़ी और रीलबाज़ी की होती दिखाई दी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, लेकिन आंदोलन की गंभीरता के बीच कई नेता और कार्यकर्ता मोबाइल कैमरों के सामने व्यस्त नजर आए। प्रदर्शन स्थल के ऊपर लगातार कई ड्रोन उड़ते दिखाई दिए, जो पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आंदोलन से अधिक फोकस सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने पर दिखाई दिया।

ग्रामीण कार्यकर्ताओं को नहीं पता था आंदोलन का उद्देश्य

प्रदर्शन में शामिल कई ग्रामीण क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं से जब आंदोलन के उद्देश्य के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, “भैया ने बोला था, इसलिए आ गए।” इससे यह सवाल भी खड़ा हुआ कि क्या कार्यकर्ताओं को आंदोलन के मूल मुद्दे की पर्याप्त जानकारी थी या नहीं।

NEET के छात्र और शिक्षक रहे नदारद

कांग्रेस और NSUI द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक था। NSUI पदाधिकारियों ने पहले छात्रों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन कार्यक्रम में न तो कोई उल्लेखनीय संख्या में NEET छात्र दिखाई दिए और न ही किसी शिक्षक की मौजूदगी नजर आई।

सोशल मीडिया पर रीलों की भरमार

प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक पर नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा बड़ी संख्या में रील और वीडियो पोस्ट किए गए। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या कांग्रेस की राजनीति अब जमीनी संघर्ष से ज्यादा सोशल मीडिया आधारित राजनीति बनती जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने किया बल प्रयोग

विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा प्रदर्शनकारी छात्रों और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई। कई कार्यकर्ताओं के घायल होने और कुछ को गंभीर चोटें आने की बात कही जा रही है।

“भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो प्लीज.

कार्यक्रम के दौरान कई बार ऐसे दृश्य भी देखने को मिले जब प्रदर्शनकारियों की प्राथमिकता विरोध प्रदर्शन से ज्यादा कैमरे के सामने दिखाई देना प्रतीत हुई। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, कई बार “भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो प्लीज” जैसी आवाजें भी सुनाई दीं।

क्या आंदोलन अब सोशल मीडिया तक सीमित हो रहे हैं?

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कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षाकृत सीमित नजर आई। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठने लगा कि क्या कांग्रेस के आंदोलन अब जमीनी मुद्दों से ज्यादा सोशल मीडिया रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या कुछ नेताओं की सोशल मीडिया केंद्रित कार्यशैली का प्रभाव अब संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं पर भी दिखाई देने लगा है। क्या आंदोलन जनसंघर्ष का माध्यम हैं या फिर वायरल वीडियो और रील बनाने का मंच बनते जा रहे हैं?

हालांकि कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक अपनी बात पहुंचाना भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन जिस तरह प्रदर्शन के दौरान कैमरे, मोबाइल फोन और ड्रोन चर्चा का केंद्र बने रहे, उसने पार्टी की रणनीति और प्राथमिकताओं को लेकर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

अब देखना होगा कि कांग्रेस NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर आगे किस प्रकार का जनआंदोलन खड़ा करती है, या फिर विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और सोशल मीडिया रीलें ही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर रह जाएंगी।

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